एक नज़्म
लेखक
चालाकी से बचना सीखें, गीत - ग़ज़ल कुछ रचना सीखें।
घुट-घुट मरने से अच्छा है, दुश्मन से हम लड़ना सीखें।।
मुश्किल है हर दिल में बसना, यादों में बस रहना सीखें।
जाँ मारे ज्यादा की ख़्वाहिश, गुज़र कमी में करना सीखें।।
बिना पंख परवाज़ भरें पर, उसके पहले चलना सीखें।
हर जगह बोलना ठीक नहीं, कहीं-कभी चुप रहना सीखें।।
मुमकिन नहीं मीठा हो हरदम,कड़वें फल भी चखना सीखें।
आँखों से छलके आबों के, अल्फ़ाज़ों को पढ़ना सीखें।।
समन्दर की शिकायत छोड़े, दरिया सा हम बहना सीखें।
रोने से हासिल क्या होगा, बेहतर है कि हँसना सीखें।।
लेखक
चालाकी से बचना सीखें, गीत - ग़ज़ल कुछ रचना सीखें।
घुट-घुट मरने से अच्छा है, दुश्मन से हम लड़ना सीखें।।
मुश्किल है हर दिल में बसना, यादों में बस रहना सीखें।
जाँ मारे ज्यादा की ख़्वाहिश, गुज़र कमी में करना सीखें।।
बिना पंख परवाज़ भरें पर, उसके पहले चलना सीखें।
हर जगह बोलना ठीक नहीं, कहीं-कभी चुप रहना सीखें।।
मुमकिन नहीं मीठा हो हरदम,कड़वें फल भी चखना सीखें।
आँखों से छलके आबों के, अल्फ़ाज़ों को पढ़ना सीखें।।
समन्दर की शिकायत छोड़े, दरिया सा हम बहना सीखें।
रोने से हासिल क्या होगा, बेहतर है कि हँसना सीखें।।



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