केबीसी विजेता घोषित कर आदिवासी युवक से 6 लाख रु ठगे,

व्हाट्सअप पर फर्जी सर्टिफिकेट भेज राशि हड़प ली...

धार, एमपी मीडिया पाइंट 

फर्जी प्रमणपत्र दिखा कर केबीसी  विजेता बनाकर रकम ऐंठने का गोरखधंधा  तीव्र गति से फैलता जा रहा है । इस वनवासी क्षेत्र में भी कुछ युवक इस प्रकार की ठगी का शिकार हो चुके है । 

बधाई हो ,आप केबीसी में व्हाट्स एप विनर बन गए है। आप 25 लाख रुपये जीत चुके है इस प्रकार का सर्टिफिकेट बाग के समीपस्थ ग्राम पिपरियापानी के युवक के व्हाट्सएप  पर आया और ठगी का सिलसिला शुरू हुआ । 25  लाख रुपये प्राप्त करने की चाह में 15 दिन के अंतराल में इनकम टैक्स , एन ओ सी , बीमा , बैंक डिमांड , करेंसी चेंज आदि के नाम पर  जालसाज व्यक्ति द्वारा  दिये गए खाते में इस युवक द्वारा क्रमशः *6 लाख* की राशि डाल दी गई , किन्तु हाथ में कुछ नही आया । अब जालसाज गिरोह द्वारा 1 लाख 80 हजार रु खाते में डालने का कहा जा रहा है । ठगी के शिकार इस युवक द्वारा अपने रिश्तेदारों  व परिचित लोगो से उधार लेकर 6 लाख की राशि जुटाई गई । मुफ्त के धन पाने की ललक में अपने 6 लाख रुपये गंवाने वाला *युवक ग्रेजुएट* है  व अब उसे यकीन हो गया है कि वह ठगी का शिकार हो गया है । 

  ग्राम पिपरिया पानी के युवक दिनेश पिता बनसिंह मुझालदा ने बताया कि  28 जुलाई को मेरे व्हाट्सअप पर हनीफ नामक व्यक्ति का  के बीसी विजेता बनने व 25 लाख रु जीत जाने का  मैसेज व सर्टिफिकेट आया । इसके बाद मुझसे   इनकम टैक्स ,एन ओ सी, करेंसी चेंज, टीडीएस, बैंक डिमांड, आदि जमा करने के नाम पर क्रमशः 4 लाख की  राशि बैंक ऑफ इंडिया व भारतीय स्टेट बैंक  की  सीतामढ़ी( बिहार) व कोलकाता शाखा के इरशाद आलम , समीमा , संजयकुमार , रँधिरकुमार , रविशंकर , संजयसिंह आदि के खातों में  डलवाने के बाद  मुझे 25 लाख का चेक मोबाइल पर दिखाया गया और कहा गया कि अब ये आखिरी अमाउंट डाल दो , आपके खाते में 25 लाख की राशि आ जायेगी , इसके बाद मुझे एक और खुशखबरी  दी गई  कि आप 85 लाख की टोयोटा कार भी जीत चुके हो , 25 लाख का चेक व टोयोटा कार दोनों साथ में दी जाएगी ,  कार का रजिस्ट्रेशन शुल्क 2 लाख दस हजार है ,   मेरे द्वारा तीन बार में ₹210000 की राशि भर दी गई अब इनकम टेक्स के नाम पर  एक लाख अस्सी हजार की और मांग की जा रही है  , । उल्लेखनीय है कि उक्त युवक को  नगर के परिचितों ने ठगी की जाने वाली इन घटनाओं से आगाह भी किया था किंतु  दिनेश मुजाल्दा नही माना ,व जालसाजों  पर विश्वास करता रहा  और ठगों के जाल में उलझता गया व जालसाजों के कहे अनुसार राशि की अन्यों से उधार लेकर व्यवस्था कर  उनके खातों में राशि डालता रहा । 29 जुलाई से 14 अगस्त के बीच  15 दिन के अंतराल में इतनी बड़ी राशि ठगों के खातों में डालने के बाद अब अपनी गलती  पर पछता रहा है ।  इस मामले में थाना प्रभारी एमपी वर्मा ने कहा  की  इस प्रकार के फर्जी कालो से बचना चाहिए और पुलिस हमेशा लोगों को सावधान करती आई है ।
खासबात यह है कि पुलिस सिर्फ़ सावधान करती है लेकिन इस प्रकार के अपराधियों तक नहीं पहुंच पाती। साइबर क्राइम पर पुलिस का कोई नियंत्रण नहीं हो पाया।  wa पर निगाह की बात पुलिस करती है लेकिन निगाहें सिर्फ़ "रोज नामचे" पर रहती है।
मध्यप्रदेश के इछावर मे भी इसी प्रकार की घटनाओं के समाचार प्राप्त हो रहे हैं। लेकिन साइबर क्राइम का पर्दाफाश करने मे पुलिस नाकामयाब रही।
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