लेखक

कश्मीरी पंडित हूं मैं

अपने हक से वंचित हूं मैं 
अपने घर से दंडित हूं मैं
 बिखरा बिखरा खंडित हूं मैं
 और कोई नहीं कश्मीरी पंडित हूं मैं

गहरे घावो से मूर्छित हूं मैं
 पल पल मर कर जीवित हूं मैं 
सब की खामोशी से क्रोधित हूं मैं
 भूल गई जिसे दुनिया वह अतीत हूं मैं
 और कोई नहीं कश्मीरी पंडित हूं

रुदन विलाप का संगीत हूं मैं 
 तुम सबके मोन का गीत हूं मैं
 तुम सब के अभाव से विस्मित हूं मैं
 व्यवस्थित दुनिया में अव्यवस्थित हूं मैं
 और कोई नहीं कश्मीरी पंडित हूं मैं

पूरी दुनिया में  चर्चित हूं मैं 
अतीत की तारीख में वर्णित हूं मैं
 अन्याय हिंसा से शोषित हूं मैं
 अपने धर्म के कारण पीड़ित हूं मैं
 और कोई नहीं कश्मीरी पंडित हूं मैं

शांति अपनाकर लज्जित हूं मैं
 तुम सब के भविष्य का अमृत हूं मैं
 तुम सब के लिए भी चिंतित हूं मैं
 मानो या ना मानो तुम सबका हित हूं मैं 
और कोई नहीं कश्मीरी पंडित हूं मैं

तुम सब की खामोशी से व्यथित हूं मैं 
पर सब के भविष्य के लिए सीख हूं मैं 
आने वाले कल का निश्चित हूं मैं
 तुम सब का मित्र हूं मैं 
और कोई नहीं कश्मीरी पंडित हूं मैं

चेतन जोशी, उज्जैन, मध्यप्रदेश

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 परिचय 

चेतन श्री कृष्णा , महाकाल की नगरी उज्जैन मध्य प्रदेश के निवासी हैं। उज्जैन से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका मानस वंदन और मानस स्तंभ से जुड़े हुए हैं। आपकी रचनाओं का प्रकाशन होता रहता है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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