लेखिका 

 " माँ तो बस माँ होती है " :
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मां तो बस मां होती है बच्चों के सपनों में अपने सपने तलाश लेती है----चिरय्या आज फिर उदास है,नन्हें चूजे (बच्चे) आसमान छूने को तैय्यार है ,उनके सपनों को मिल गई नये हौसलों की उड़ान है ,अपनी मिट्टी से दूर ---आसमान की ऊंचाई ,कितने नीचे लगते है ,धरती और अमराई ----दुआ करती हुई चिरय्या को इंतजार है ,चूजों के आसमान छू लेने का ,फिक्र है उसे उड़ान संरक्षण की हो----तेज हवाओ की नही ---ममत्व ने पाला है ,उन सपनों को जिन्हें घौंसला छोड़ हौसलों की उड़ान भरना है  यही वो सपना है ,जो बच्चों के साथ मां का अपना है------पर अब घर आंगन चिल्लाहठों से खाली है,घर के सन्नाटो में बच्चों को पुकारती आवाजें बार बार खाली लौट आती हैै,हर आहट चौंका देती है,बच्चों के होने का भरम करा देती है,चूल्हे पर पकती सौंधी गंध अब नहीं सुहाती है----बच्चों के ना होने की बार बार याद दिलाती है-----बच्चों के सपने पूरा करने की चाहत हर मां की होती है ,चाहे पंछी हो या इंसान हर किसी की होती है-----सपनों की एक उड़ान-----सपनों की तरफ बढ़ते कदम दूरियों को बढ़ाते चलते है----बावजूद इसके एक मां को बच्चों की कामयाबी नई ऊर्जा ,नई ताजगी देते है,बच्चो के सपनों के पूरा होने के क्रम में जरूरत है ,उन्हें जीवन के अनुभवों की -----ऊंची उड़ानो की चाह तुम्हें कष्टों से लड़ना सिखला देगी ---तुम्हारी चाह से घर के आंगन में एक आह है------परंतु मुस्कान और आंसूओं का समन्वय ही जीवन है ,आंसूओ को समेट कर मुस्कुराना ही तुम्हारे सपनो को सर आँखो पर बिठाना है,सपनो के महल अपनों के दर्द पर खड़े है ,व्यक्ति की इच्छा सदैव जीतने की होती है हारना उसे प्रिय नहीं होता,परंतु जीतने से पहले हारना जरूरी होता है,क्यूंकि हार कर जीत लेने की खुशी स्थायी होती है-----जो जीवन को नये आयाम देती है,जीवन की गति को लय में बदल देती है,परंतु सपनो की उड़ान में अपने पीछे छूट जाते है---इस छूटने का दर्द कितना गहरा है ,हर दर्द पर एक पहरा है----इस दर्द के कम होने की दुआ मांगती मां की आशायें ,सपनों के जल्दी पूरा होने की दुआयें---बच्चों के घर लौटने की आशायें----मां तो बस मां होती है ---बच्चों के सपनों में अपने सपने तलाश लेती है---पर क्या बच्चे मां की आंखों में पलता सपना देख पाते है ? या अपनी उड़ान में मां को पीछे छोड़ आगे निकल जाते है-------। 

 मंजु श्रीवास्तव, छिंदवाड़ा, मप्र

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