हमारे बुजुर्ग
◆◆◆◆◆◆लेखिका
वो पुरानी सी बैठक जहाँ बैठकर
बाबा नाना हुक्का पिया करते थे।
मैंने सुना है बंटवारे में बंट गयी है।
उस जगह अब कोई नही बैठता है।
बस उनका बेटा जो हुक्का नही पीता
वह याद करता है उनको वहां प्रतिदिन
मैंने देखा है उसकी आँखों में वो नमी वो दर्द
पुराना हो गया है वह उस कोने में पड़ा।
उनका नया बेटा आने ही वाला है सुनो।
फेंक देगा उसे भी उठाकर कचरे के ढेर में।
सुनो वही असली इकलौता बेटा है उनका
मत फेंको उस चिलम को।
कुछ इस तरह एक सदी खत्म हो जाती है।
और फिर सिलसिला चल पड़ता है बीड़ी सिगरेट का।
शायद फिजाओं में शराब भी घुलने लगती है।
नही रहती है तो वो दरवाजे की कुंडियाँ
और बात करते हुक्का फूंकते वो बुजुर्गों की टोलियाँ।
नेहा शर्मा, दुबई
------------------परिचय
नेहा शर्मा, दुबई निवासी हैं। साहित्य सेवा के लिए दोहा, कविता, गजल, गीत, कहानी, सांस्मरण, हास्य व्यांग्य, पत्रलेखन, लघुकथा आदि विधाओं में लेखन करती हैं। आप हिंदी सहित अंग्रेजी, हरियाणवी और पंजाबी भाषा पर भी समान अधिकार रखती हैं। इसके साथ ही आप साहित्य के नव हस्ताक्षरों को मंच उपलब्ध कराने के लिए साहित्य अर्पण नामक संस्था का संचालन भी करती हैं। यह संस्था विदेश में हिंदी के प्रचार प्रसार के दायित्व का निर्वाह भी कर रही है। आपके कई साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। दुबई सहित आबूधाबी आदि स्थानों पर भी साहित्यिक मंचों पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए आयोजित करती रहती हैं। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर हार्दिक स्वागत है।संपादक


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