मंत्रोप्चारण साथ 108 आहुतियां और लगाया, भगवान जगदीश को भात का भोग...
सीहोर, एमपी मीडिया पाइंट
शहर के छावनी स्थित प्राचीन भगवान जगदीश मंदिर में शिव प्रदोष सेवा समिति के तत्वाधान में जारी भगवान विष्णु माता लक्ष्मी यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने गायत्री मंत्रों के साथ आहुतियां दी। इस मौके पर प्रवचन हाल में श्रद्धालुओं को आन लाइन संबोधित करते हुए पंडित मयंक शर्मा ने कहा कि जीवन में सत्य बोलना ही ईश्वर की सच्ची आराधना करना है। परमेश्वर ही सत्य है। शिव का अर्थ शुभ होता है और सुंदरम प्रकृति को कहते हैं। जो व्यक्ति परमेश्वर पर विश्वास करता है वही सत्य बोलने की ताकत रखता है और जो सत्य बोलता है उसके जीवन में शिव अर्थात शुभ होने लगता है। शुभ का अर्थ सब कुछ अच्छा होने लगता है और जीवन एक सुंदर सफर बन जाता है। रविवार को अश्विन नक्षत के दौरान आधा दर्जन से अधिक श्रद्धालुओं ने यज्ञाचार्य पंडित पवन व्यास, मनोज दीक्षित मामा, गणेश शर्मा और कुणाल व्यास, पुजारी रघुनंदन व्यास, राहुल व्यास के मार्ग दर्शन में गायत्री मंत्रों के साथ राजकुमार नामदेव, मोनिका नामदेव, लखन ठाकुर, सोना ठाकुर, अनिल माहेश्वरी, हर्षा माहेश्वरी, आनंद माहेश्वरी समा माहेश्वरी और किशोरी लाल परमार आदि ने आहुतियां दी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला संस्कार मंच के संरक्षक श्री दीक्षित ने बताया कि सोमवार को शिव सेवा प्रदोष समिति के द्वारा देवयज्ञ का आयोजन किया जाएगा। जिसमें 108 गायत्री मंत्रों के अलावा अन्य मंत्रों के साथ आहुतियां दी जाएगी। इसके अलावा भगवान जगदीश को भात का भोग लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि देवयज्ञ जो सत्संग तथा अग्निहोत्र कर्म से सम्पन्न होता है। इसके लिए वेदी में अग्नि जलाकर होम किया जाता है यही अग्निहोत्र यज्ञ है। यह भी प्रात:काल में गायत्री छंद के साथ किया जाता है। इसे करने के नियम हैं। इससे देव ऋण चुकता होता है। हवन करने को देवयज्ञ कहा जाता है। हवन में सात पेड़ों की समिधाएं (लकडिय़ां) सबसे उपयुक्त होतीं हैं- आम, बड़, पीपल, ढाक, जांटी, जामुन और शमी। हवन से शुद्धता और सकारात्मकता बढ़ती है। रोग और शोक मिटते हैं। इससे गृहस्थ जीवन पुष्ट होता है।


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