एमपी मीडिया पाइंट टीम

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इछावर/ब्रिजिशनगर/फांगिया/भाऊँखेड़ी/नादान//लाड़कुई/ रेहटी


शक्ति की भक्ति मे डूबा समूचा क्षेत्र,
विजयासन देवीधाम सलकनपुर, 20 भुजाधारी महाकाली धाम कुरी,मरीह माता धाम कांकरखेड़ा, इछावर के नजदीक पहाड़ों पर विराजमान सूर्या बढ़ली वाली शूलधारिणी, मंडलगढ़ नादान के जंगल मे विराजमान भगवई माता, भाऊँखेड़ी मे विराजित दुर्गा-ज्वालादेवी , कुरी के पहाड़ पर विराजित चमत्कारिक 20 भुजाधारी महाकाली नवरात्र के अवसर पर देवी भक्तों का दर्शनार्थ तांता लगा हुआ है। इस सभी प्राचीन सिद्ध देवी दरबारों मे प्रतिदिन मनोकामनाएं लेकर हजारो श्रद्धालु मत्था टेंक रहे हैं। देवी मंदिरों की विद्युत सज्जा भी भक्तों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। 
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झिलमिलाता हुआ मां विजयासन का दरबार भक्तों के लिए बन रहा आकर्षण का केन्द्र,
20 भुजाधारी महाकाली धाम कुरी मे लगा भक्तों का तांता,

सीहोर 04  अक्टूबर,2019
एमपी मीडिया पाइंट 


     नवरात्रि मेले के दौरान जिले के सलकनपुर मंदिर में मां विजयासन देवी धाम पर कलेक्टर 
नादान से घने जंगल भगवई (भगवती) माता मंदिर पदयात्रा कर चढ़ाई गई 108 फिट लम्बी चुनरी
प्रतिदिन धार्मिक आयोजनों की कड़ी मे शुक्रवार 4 अक्टूबर को देवीभक्तों ने नादान से पदयात्रा कर जंगल मे विराजी भगवाई माता को 108 फिल लम्बी चुनरिया चढाई। इस अवसर पर कमलेश माहेश्वरी,सुरेश माहेश्वरी,संदीप,संजू समेत अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आयोजनों की इसी कड़ी मे आते-जाते देवीभक्तों के लिए जारी निशुल्क लंगरसेवा


        माँ विजयासन देवी लंगरसेवा समिति ब्रिजिशनगर द्वारा लगातार सातवें वर्ष इछावर-नसरुल्लागंज हाइवे पर देवी भक्तों की निशुल्क लंगर सेवा जारी है।समिति सदस्य राजेश मेवाड़ा ने बताया कि नवरात्रि काल मे दर्शनार्थ सलकनपुर जाते-आते सैकड़ों देवी भक्तों का समिति सदस्यों द्वारा पूर्ण सेवाभाव से सत्कार जारी है।हाइवे ब्रिजिशनगर जोड़ पर इस वर्ष लंगरसेवा की शुरुआत 10 अक्टूबर से की गई थी जो नवमीं तक जारी रहेगी।
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        20 भुजाधारी चमत्कारी महाकाली 

देवी दरबारों मे नित्य पूजा-पाठ धार्मिक अनुष्ठानों मे हजारो भक्त शरीक हो रहे हैं।
लाड़कुई से 10 किलोमीटर कुरी जंगल के पहाड़ पर विराजी 20 भुजाधारी चमत्कारी महाकाली धाम मे भी दर्शनार्थियों का तांता लगा है। यह महाकाली सीहोर जिले मे एक मात्र धाम है जहां महाकाली चमत्कारिक रुप से स्थापित हुई थी और अपनी 20 अनुपम भुजा से भक्तों के रक्षार्थ और दुष्टों के संहार के लिए विराजित हैं। यहां की प्राचीन प्रतिमा के चमत्कारिक किस्से अब जग जाहिर हो चुके हैं इसीलिए दर्शनार्थ पहुंचने वाले भक्तों की संख्या मे वर्ष दर वर्ष तेजी के साथ बढोतरी हो रही है। प्रतिदिन यज्ञादि के कार्यक्रम जारी हैं।



इछावर-सीहोर हाईवे पर तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर प्राचीन मरीहमाता धाम स्थित है। जब अवसर नवरात्र का होता है तो देवी दर्शन लिए प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है। कहते हैं कि कांकरखेड़ा वाली मरीह माता के दर्शन मात्र से मनुष्य की परेशानियां छू-मंतर हो जाती हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व इछावर वासियों ने 
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14 वर्षों से मंदिर में जल रही ज्वाला देवी से लाई गई जोत

                दुर्गा- ज्वालादेवी भाऊँखे़ड़ी
इछावर 
  
हिमाचल प्रदेश में स्थित ज्वाला देवी मंदिर से 14 वर्ष पूर्व लाई गई जोत आज भी इछावर ब्लॉक के गांव भाऊखेड़ी में निरंतर जल रही है नवरात्री पर मां ज्वाला जी के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त भाऊखेड़ी आते है।                                  ब्लॉक के गांव भाऊँखेड़ी में ज्वाला जी का मंदिर है इस मन्दिर की खासियत यह है कि यहाँ 14 वर्ष पहले ग्राम के लोग हिमाचल प्रदेश स्थित ज्वाला देवी मंदिर से जलती हुई जोत भाऊखेड़ी लेकर आये फिर उसे बड़े विधि विधान के साथ ग्राम के दुर्गा मन्दिर में स्थापित कर दी गई तभी से आज तक यहाँ मन्दिर में मां ज्वाला देवी की निरंतर जोत जल रही है मन्दिर के पुजारी दिनेश दास बैरागी ने बताया कि जब से मन्दिर में मां ज्वाला देवी की स्थापना हुई है तब से ग्राम पर किसी भी प्रकार की विपत्ति  नही आई है। ग्राम के ही कई ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम में किसी के घर अगर कोई मवेशी जनती है तो जब उसके दूध का घी बनाते हैं तो पहली बार जो घर मे घी बनता है वह यहा माता जी की जोत में देकर जाते है ग्रामीण।
इसी मंदिर मे मां दुर्गा की चमत्कारिक प्रतिमा भी है। पहले यह दुर्गा मंदिर के नाम से विख्यात था लेकिन अब 14 वर्षों से यह धार्मिक स्थल दुर्गा-ज्वाला देवी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि सच्चे दिल इस मंदिर मे की गई भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यह मंदिर इछावर तहसील मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर भाऊँखेड़ी मे स्थित है। भक्तों को इछावर-सीहोर हाईवे से 3.5 किलोमीटर का निजि अथवा यात्री वाहनों से सफर तय करके भाऊँखेड़ी पहुंचना होता है।
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इछावर-सीहोर हाईवे पर तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर प्राचीन मरीहमाता धाम स्थित है। जब अवसर नवरात्र का होता है तो देवी दर्शन लिए प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है। कहते हैं कि कांकरखेड़ा वाली मरीह माता के दर्शन मात्र से मनुष्य की परेशानियां छू-मंतर हो जाती हैं। सैकड़ों वर्ष पूर्व इछावर वासियों ने महामारी से नगर को बचाने के लिए इसी चमत्कारिक स्थल पर देवी प्रतिमा स्थापित की थी जो प्राचीन काल से मरीह माता अर्थात (मरने से बचाने वाली) के नाम प्रख्यात हैं। यहां देवी के दरबार मे मत्था टेंकने वाले श्रद्धालु सदैव निरोगी बने रहते हैं। कांकरखेड़ा वाले  मरीहमाता धाम पर भक्तों की अगाध श्रद्धा है। 

इछावर के नजदीक पहाड़ पर मां शूलधारिणी  सूर्या बढली पहाड़ी पर प्राचीन चमत्कारिक मां शूलधारिणी देवी विराजित हैं।
इस प्राचीन देवी दरबार मे देवीभक्त दुर्गम पहाड़ियों से गुजरकर प्रतिदिन मत्था टेंकने पहुंच रहे हैं। इस देवी दरबार की भी महिमा अपरंपार है। कुल मिलाकर इछावर से सलकनपुर तक विंध्याचल पर्वत पर मां भगवती के अनेक चमत्कारिक स्थान हैं जिस पर प्राचीनकाल से ही श्रद्धालुओं की गहरी आस्था विद्धमान है।
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झिलमिलाता हुआ मां विजयासन का दरबार भक्तों के लिए बन रहा आकर्षण का केन्द्र,
20 भुजाधारी महाकाली धाम कुरी मे लगा भक्तों का तांता,

रेहटी 04  अक्टूबर,2019
एमपी मीडिया पाइंट 


     नवरात्रि मेले के दौरान जिले के सलकनपुर मंदिर में मां विजयासन देवी धाम पर कलेक्टर अजय गुप्ता के निर्देशानुसार की गई संपूर्ण व्यवस्थाओं में से विशेष तौर से की गई विद्युत सजा-सज्जा श्रद्धालुओं के लिए आकषर्ण का केन्द्र बन रही है। रात्रि के समय में मंदिर प्रांगण में लाईट डेकोरशेन की व्यवस्था से श्रद्धालुओं को बहुत ही मनोहारी दृश्य देखने को मिल रहा है। वैसे तो नवरात्रि मेले के दौरान जिला प्रशासन द्वारा की गई पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था एवं मातृत्व कक्ष आदि व्यवस्थाओं में भी कोई कमी नहीं है। सभी अधिकारी/कर्मचारी निष्ठापूर्वक अपनी कर्तव्यों का निर्वाहण कर रहे हैं। मेले के दौरान कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सलकनुपर पहुंचकर संपूर्ण व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं। 5 अक्टूबर को महानिशा पूजन एवं रात्रि जागरण के दौरान मंदिर के पट रातभर खुले रहेंगे।
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