बुजुर्गो की पेंसन में आड़े आ रही है
आधार कार्ड में अंकित उम्र।
राजेश बनासिया, भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
पहले सरकार ने पहचान पत्र बनाये जिन्हें लोग वोटर आईडी के नाम से भी जानते है व जब आधार
कार्ड नही बना था तो उस समय पहचान
के तौर पर वोटर आईडी ही मान्य किया जा रहा था। सरकार बदली, नीतियां बदली, फिर आधार कार्ड लागू कर दिय। ग्राम्याचलों में आधार कार्ड बनवाने के लिए अप्रशिक्षित,अनाड़ी,अनुभवहीन लोगो की टीम भेज दी गई।उन्होंने कई लोगो के आधार कार्ड में भारी गड़बड़ी की जिसका खामियाजा आज भी कई लोग को उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों एक निजी सर्वे में यह बात सामनें आई है कि जो लोग अब उम्र के आखरी पड़ाव में है उनको अभी शासन की किसी भी योजना के तहत कोई पेंशन नहीं मिल पार रही रही है।जब 70,80 साल के बुजुर्ग लोगो से इस विषय मे बात की गई तो सामने आया कि वोटर कार्ड और आधार कार्ड में उम्र में काफी अंतर पाया गया।अब वैसे वोटर कार्ड पहले बने है तो फिर उनके आधार पर ही बुजुर्गों की पैंशन मंजूर होना चाहिए इस मामले की ओर भी जानकारी ली गई तो पंचायत स्तर पर जो भी पेंशन का कार्य देखते है वह बुजुर्गों को सही जानकारी नही दे रहे है।इसलिए भी ग्रामीण अंचलों के सेकड़ों गाँवो में कई बुजुर्ग सिर्फ आधार कार्ड व वोटर कार्ड में उम्र को लेकर ही पेंशन से वंचित हैं। सरकार को इस दिशा में उचित कदम उठाना चाहिए।
बुज़ुर्ग ग्रामीणों का कहना है कि आधार कार्ड में उम्र की वजह जिन उम्रदराज लोगो को पेंशन नहीं मिल पा रही, उन लोगो के लिए वोटर आईडी में उम्र के आधार पर पेंशन स्वीकृत हो अगर यह पहल हो जाए तो शासन की योजना का लाभ वह बुजुर्ग भी उठा लेंगे जो अब जिंदगी के आख़री पड़ाव पर हैं।


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