राजेश शर्मा
सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात सीहोर जिले के वन परिक्षेत्र इछावर मे इमारती खेर की लकड़ी से भरा ट्रक जब्त हुआ। ट्रक की जब्ती के बाद वन विभाग का सीना फूला हुआ है, जो होना भी चाहिए क्योंकि वर्षों बाद मौके पर दो आरोपी विभाग के हपट्टे भी चढ़े। लेकिन सवाल यह उठता है कि "कौन कहता है कि जब्त किया ट्रक पहला ही था!!"सूत्र बताते हैं कि इछावर के जंगल मे लकड़ी माफिया काफी अर्से से मंगल कर रहे हैं। माफिया की वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से मुलाकात जग-जाहिर है। एक गरीब व्यक्ति को अपने मकान मे दरवाज़े-खिड़की लगवाने के दौरान गिरा पसीना उसे सपने मे भी याद आता है, लेकिन लकड़ी के माफियाओं का ट्रक सहजता से आरपार हो जाता है। आखिर कैसे!!
प्रशासन का पूरा ध्यान रेत माफियाओं पर केंद्रित है क्योंकि उनके माथे पर मुख्यमंत्री कमल नाथ के आदेशों का पुलिंदा जो रखा हुआ है। अलसुबह से इछावर क्षेत्र मे एसडीएम प्रगति वर्मा की चौकीदारी वैसे काबिल-ए-तारीफ़ है लेकिन इस क्षेत्र मे केवल रेत के ही ट्रक नहीं निकलते, सागौन,खेर,चंदन के ट्रकों का भी अवैध रुप से परिवहन किया जाता है जिसपर किसी की नजर क्यों नहीं!
क्या सेमिनारों तक ही पर्यावरण के संरक्षण की चर्चा सीमित रह गई! क्या अफसरानों का दायित्व समारोहपूर्वक पौधरोपण तक ही सिमटकर रह गया है। पिछले एक दशक के दौरान रोपे गए कितने पौधे जीवित हैं, इसकी चर्चा बाद मे।
लेकिन कितने वृक्षों का कत्ल-ए-आम हुआ इसका हिसाब किसी के पास नहीं।
इछावर रेंज के दौलतपुर से "दौलत" आखिर किसके इशारे पर लुट रही!! विभाग ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई को अंजाम दिया, लेकिन "विभागीय विभीषण" भी तो कोई होगा। इन "विभीषणों" पर कार्रवाई का दायित्व किसका है। कैसे दौलतपुर से निकलकर अवैध इमारती लकड़ी का ट्रक धामंदा तक पहुंच जाता है यह सवाल हर पर्यावरण प्रेमी के ज़हन मे उठना स्वभाविक है।
पत्थर की इबारत कहती है कि जंगलों के सफाए पर अामादा माफियाओं के इरादों मे अब "खेर का खूंटा" ठोकना जरुरी हो गया है। इसके लिए जरुरी है कि प्रशासन रेत के साथ लकड़ी के अवैध परिवहन पर भी कड़ी निगरानी रखे। आज की कार्रवाई को लेकर भले ही वन विभाग सीना ताने लेकिन "ट्रक के ट्रक" निकलने का यह सबूत भी लोगों के होंश फाख्ता करने वाला है।


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