सीप-कोलार लिंक परियोजना-  उद्घटन के पहले ही क्षतिग्रस्त 

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिला सीहोर की इछावर तहसील मे सीप-कोलार लिंक परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, और उद्घाटन के पहले ही जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई। सीप-कोलार लिंक परियोजना की नहर की लागत करीब- 115 करोड़ है जो हाल ही मे भ्रष्टाचार के गाल मे समा गई।

इछावर से एमपी मीडिया पाइंट के लिए खास रिपोर्ट 

- किसानों के खेेतोें को नदी मे तब्दील कर दिया गया।वही राजधानी भोपालवासी भी परियोजना के लाभ से वंचित रह जाएंगे।

भष्टाचार किस तरह से सरकार एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी योजनाओें कोे पलीता लगा रहा हैै, इसका ताजा उदाहरण सीप-कोलार लिंक परियोजना है। अभी इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा जो कार्य किया गया वह इतना निम्न स्तर का कार्य किया गया इससे अधिकारी एवं ठेकेदार की मिलीभगत साफ तौर पर जाहिर हो रही है!!
खासबात यह कि अभी तक ठेकेदार के ऊपर कोई कार्रवाई  क्यों नहीं की गई!

किसानों की समस्या देखकर 115 करोड़ की लागत से कोलर-सीप लिंग परियोजना बनाई गई जिससे की क्षेत्र की जनता, किसानों को कभी पानी की कोई समस्या ना हो, साथ ही राजधानी भोपालवासियों की जलापूर्ति हो सके।
लोगों का कहना है कि अधिकारी एवं ठेकेदार की मिलीभगत से परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी है। सीप परियोजना में  गाइडलाइन को नजरअंदाज रखा गया एवं गुणवत्ताविहीन कार्य किया गया।
प्रश्न यह उठता है कि उद्घाटन से पहले कैसे फूट गई नहर? नहर क्षतिग्रस्त होने के कारण कई किसानों केे खेत नदी मेें तब्दील हो गए,तो वहीं अब भोपालवासियों को भी पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध नहीं होे पाएगा।
सीप नदी पर बननेे वाली सीप-कोलार लिंक परियोजना कोे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2012 में मंजूरी दी थी। योजना को पूरा करने की डेडलाइन 2015 तय की गई थी, लेकिन यह योजना 2020 तक भी पूरी नहीं हो सकी है। शिवराज सिंह मंत्रिमंडल ने 30 अक्टूबर 2017 को इस परियोजना के लिए 137 करोड़ 21 लाख 5 हजार रुपए की स्वीकृति भी दी थी। योजना का उद्देश्य सीहोर जिले की इछावर तहसील के गांवों में किसानों कोे खेती के लिए पानी देने के साथ ही कोलार डेम मेें भी पानी लाना था, ताकि राजधानी को पर्याप्त मात्रा में पेयजल मिल सके।

निर्माण एजेंसी द्वारा परियोजना को 2015 में पूरा करना था, लेकिन 2020 तक भी पूरी नहीं हो सकी है। समय ज्यादा लगने से इसकी निर्माण लागत भी बढ़ रही है तो वहीं जिन लोगों के लिए इसे बनाया जा रहा है उन्हें भी इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

हजारों लोग लाभ से वंचित

परियोजना लागू किए जाने का उद्देश्य यह था कि इछावर तहसील केे किसानोें कोे खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके औैर इसके जरिए कोलार डेम में भी पानी की मात्रा बढ़ाई जा सके। इस योजना के जरिए एक नदी का पानी लिफ्ट कर डैम में छोड़ा जाएगा और पानी लिफ्ट करने के लिए बिजली से चलने वाली मोटर का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके लिए सीप नदी पर एक 22 मीटर ऊंचा कांक्रीट का डैम बनाया गया है। इस डैम से एक कांक्रीट की नहर निकाली गई है। इस नहर का पानी कालियादेव के पास नाले पर बनाए गए दूसरे डैम में आएगा। यहां से घोड़ा पछाड़ नाले पर बने डेम में पहुंचेगा।

बतादें कि कोलार डेम की क्षमता 270 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) है। यानी 270 अरब लीटर पानी एकत्रित हो सकता है। इस डैम का निर्माण वर्ष 1987 में किया गया था। औसतन डैम में हर साल 185 एमसीएम ( 185 अरब लीटर) पानी आता है। पिछले दो वर्षों सेे अच्छी बारिश होने के कारण डैम में पर्याप्त पानी हो जाता है। सीप-कोलार लिंक परियोजना से 35 एमसीएम (35 अरब लीटर) पानी अतिरिक्त मिलेगा। कोलार डैम से भोपाल के लिए हर साल 61 एमसीएम (61 अरब लीटर) पानी आरक्षित होता है।

नहर टूटने के कारण जिन किसानों केे खेेतों कोे नुकसान हुआ हैै उन्होंने भी अपनी आपबीती सुनाई। किसान जितेंद्र सिंह ने बताया कि अभी तोे नहर शुरू भी नहीं हुई थी, उससे पहले ही टूट गई। इसकेे कारण मेरेे खेत कोे ही नदी बना दिया गया है। अब तक कोई अधिकारी भी  हमारी सुध लेने के लिए नहीं आया है। इसी तरह अन्य पीड़ितोें ने भी कहा कि उनके खेतों की फसलों के अलावा उनके खेत भी खराब हो गए हैं। खेतों को नदी में तब्दील कर दिया गया है। किसानों ने अपने आर्थिक नुकसान से तहसीलदार को भी आवेदन पत्र के माध्यम से अवगत कराया है।
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कंपनी ने पूरा प्रोजेक्ट कंपलीट कर शासन को हैंडओवर कर दिया था। डेम के तीन गुना प्रेशर के कारण वीरपुरा के नजदीक नहर को डेमेज पहुंचा है। करीब 15 करोड़ रुपये का अनुमानत है। किसानों ने दायीं तरफ पानी निकासी को खुद बंद किया इसीलिए नहर का पानी   खेत मे बहुत कम क्षेत्र मे घुस गया। सरकार सहयोग करे तो क्षतिग्रस्त नहर मे वर्क शुरु भी किया जा सकता है। सांठगांठ व लापरवाही की बात बेबुनियाद है।
                   कौशल यादव
                प्रोजेक्ट मेनेजमेंट 
               निर्माण सबएजेंसी
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इनका कहना है-

तेज बारिश के कारण इस बार बांधों में पानी का भराव ज्यादा रहा है। इस कारण से ज्यादातर बांधों के गेट भी खुले हैं। सीप-कोलार लिंक परियोजना की नहर टूटने की जानकारी मिली है। संबंधित अधिकारियों से जांच कराकर स्थिति दिखवाता हूं।

- एसएन मिश्रा, एसीएस, जल संसाधन विभाग

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बृजेश सक्सेना, इछावर एसडीएम का कहना है कि अभी-अभी मामला संज्ञान मे आया है। संबंधित विभाग  के अधिकारी को अवगत कराया गया है। व जांच उपरांत उचित विभागीय  कार्रवाई की जाएगी।

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