लेखिका 

बारिश

ये बारिश सबब है जहाँ 
प्रेमी और प्रेमिका के
एक दूजे की यादों में खो जाने की ...
आसमान की छत के 
नीचे बेघर सड़कों पर 
जिंदगी बशर करते लोगों के लिए
ये बारिश अभिशाप है रोने की ... 

जहाँ ये बारिश सबब है
बड़े आलिशान ,
महलों में रह कर ,
बारिश के मज़े लेने की  ...
तो वही अपने छोटे आशियाने
में रह कर छत से टिप टिप 
बूँदे गिरने से परेशान 
रह रहे लोगों की 
ये बारिश अभिशाप है ,
उनके बैचेन होने की ।

जहाँ ये बारिश सबब है 
खुली आकाश में किसी 
के नाचने , गाने , हँसने की 
तो वही खुद को और
पानी से लबालब घर
बचाने की जुस्तजू है 
ये बारिश अभिशाप है अपनी
जमापूँजी खोने की ।

जहाँ ये बारिश है सबब 
ठंडी मौसम में गर्म चाय 
और पकौड़ी के स्वाद चखने की 
वही ये बारिश अभिशाप है 
किसी के भूख से तिलमिलाकर  रहने की 
और घनघोर घटाओं के गड़गड़ाहट 
की बेबसी के बीच 
नमक रोटी से भूख मिटाने की ।

जहाँ ये बारिश है सबब
लहलहाती फसलों को देख कर...
किसानों के आँखों में उम्मीद की किरण ,
और चेहरों पर मुस्कान की , 
वही ये बारिश अभिशाप है 
जिसकी तीव्र धाराओं से जलमग्न
पाई पाई जोड़ भूख मिटाने
 जमा किये दानों के साथ
उम्मीदों के बर्बाद हो जाने की ।।

-माधुरी पाण्डेय, सिलिगुड़ी(पश्चिम बंगाल) 

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परिचय

 माधुरी पाण्डेय , पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी शहर में रहती हैं। बी.एड द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं और एक शिक्षण संस्थान से जुड़ी हुई हैं।  बचपन से ही पढ़ने और पढ़ाने का शौक ने इनमें साहित्यिक रुझान जगा दिया। ये अपनी लेखनी के माध्यम से कविता , आलेख , कहानी लिख कर साहित्य की सेवा करने में रुचि ले रही हैं। एम पी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है। 
संपादक
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