"अंग्रेजी" की धरती पर "हिंदी" का बोलबाला कायम,
कोरोना काल के दौरान भी 31 वें वर्ष हुआ सफल आयोजन,
लंदन से एमपी मीडिया पाइंट के लिए विशेषखा रपट,
तीस वर्षों से इंग्लैंड में फहराया जा रहा हिंदी का परचम
लंदन , एमपी मीडिया पॉइंट
हिन्दी समिति यू.के. द्वारा इंग्लेंड की धरती पर बीते तीस सालों से हिंदी का परचम फहराया जा रहा है। इन अथक प्रयासों को इस बार कोरोना वैश्विक महामारी ने शिथिल करने का प्रयास किया लेकिन समिति ने इस बार ऑनलाइन जूम पर बच्चों के लिए हिन्दी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन कर अपने मजबूत इरादों से परचम को फहराने का कार्य जारी रखा। इस प्रतियोगिता में यू.के. के कई शहरों तथा जुरिक , स्विट्ज़रलैंड से लगभग 75 प्रतियोगियों ने भाग लिया । 9 से 17 वर्ष के प्रतियोगियों ने अपने विचारों को बड़ी खूबी से व्यक्त किया । भाषण प्रतियोगिता के विषय भारतीय अथवा पाश्चात्य पहनावा , कोरोना से आपका जीवन परिवर्तन , स्कूल में आपका अप्रिय विषय, सहज पके सो मीठा होय , आसमान से टपका खजूर में अटका और तानाशाही नहीं चलेगी प्रतियोगिता में शामिल किए गए। समारोह की प्रमुख बात यह थी कि इसका संचालन हिन्दी समिति की छात्राओं द्वारा ही किया गया , और भाषण का आंकलन भी समिति के कई पूर्व छात्रों द्वारा किया गया । समारोह के मुख्य अतिथि और आमंत्रित अतिथियों में कई गणमान्य लोग शामिल थे। लगभग 5 घंटे तक चले इस कार्यक्रम को बहुत सराहा गया । निर्णायक मंडल में भारत के राकेश दुबे , राजेश कुमार , लंदन से शिखा वार्ष्णेय , तितिक्षा शाह थे । इसके अलावा एक युवा निर्णायक दल भी था जिसमे महक वेदी , पूनम दीवान , और कमलेश वालिया थे । आंकलन समिति और गणमान्य अतिथि बच्चों की भाषण शैली , व्याकरण , शब्द भंडार , और उच्चारण से अत्यधिक प्रभावित हुए । उन्होंने माना कि विजेताओं को चुनने में उन्हें बहुत कठिनाई हुई । समारोह के शुरुआत में हिन्दी समिति के संरक्षक श्री पदमेश गुप्ता ने हिन्दी समिति के इतिहास की भी जानकारी दी और बताया कि 1990 से स्थापित यह समिति पिछले 30 वर्षों से सम्पूर्ण यू.के. में हिन्दी भाषा को प्रोत्साहित करने में कार्यरत है । हर वर्ष भाषण तथा वाद - विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को भारत भ्रमण के लिए ले जाया जाता है । 9 से 12 वर्ष वाले वर्ग के विजेताओं के नाम : प्रथम वर्तिका सुशांत द्वितीय आर्या पटेल तृतीय अयान कंसल चतुर्थ अवनी सिंह प्रोत्साहन पुरस्कार ख्वाहिश 13+ वर्ष वाले वर्ग के विजेताओं के नाम :प्रथम वीर ठक्कर और प्रेरणा ठक्कर को संयुक्त द्वितीय आस्था पाटिल तृतीय प्रणव भाटिया वह विद्यार्थी जो भारत में पैदा हुए हैं लेकिन काफी वर्षों से यूके में रह रहे हैं उस वर्ग के विजेताओं के नाम : प्रथम मृणाली विजय कुमार द्वितीय श्रुतिका नायर तृतीय दिव्याक्षी प्रोत्साहन पुरस्कार कुशल समारोह के समापन पर हिन्दी समिति यू.के. कि अध्यक्षा श्रीमती सुरेखा चोफला और उपाध्यक्ष श्रीमती सीमा वेदी ने सभी को धन्यवाद किया और प्रतियोगियों को यह संदेश भी दिया कि भाषण प्रतियोगिता जीतना हिन्दी सीखने का अंत नहीं है बल्कि हिन्दी में आगे बढ़ने के लिए मात्र एक कदम है ।
कोरोना काल के दौरान भी 31 वें वर्ष हुआ सफल आयोजन,
लंदन से एमपी मीडिया पाइंट के लिए विशेषखा रपट,
तीस वर्षों से इंग्लैंड में फहराया जा रहा हिंदी का परचम
लंदन , एमपी मीडिया पॉइंट
हिन्दी समिति यू.के. द्वारा इंग्लेंड की धरती पर बीते तीस सालों से हिंदी का परचम फहराया जा रहा है। इन अथक प्रयासों को इस बार कोरोना वैश्विक महामारी ने शिथिल करने का प्रयास किया लेकिन समिति ने इस बार ऑनलाइन जूम पर बच्चों के लिए हिन्दी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन कर अपने मजबूत इरादों से परचम को फहराने का कार्य जारी रखा। इस प्रतियोगिता में यू.के. के कई शहरों तथा जुरिक , स्विट्ज़रलैंड से लगभग 75 प्रतियोगियों ने भाग लिया । 9 से 17 वर्ष के प्रतियोगियों ने अपने विचारों को बड़ी खूबी से व्यक्त किया । भाषण प्रतियोगिता के विषय भारतीय अथवा पाश्चात्य पहनावा , कोरोना से आपका जीवन परिवर्तन , स्कूल में आपका अप्रिय विषय, सहज पके सो मीठा होय , आसमान से टपका खजूर में अटका और तानाशाही नहीं चलेगी प्रतियोगिता में शामिल किए गए। समारोह की प्रमुख बात यह थी कि इसका संचालन हिन्दी समिति की छात्राओं द्वारा ही किया गया , और भाषण का आंकलन भी समिति के कई पूर्व छात्रों द्वारा किया गया । समारोह के मुख्य अतिथि और आमंत्रित अतिथियों में कई गणमान्य लोग शामिल थे। लगभग 5 घंटे तक चले इस कार्यक्रम को बहुत सराहा गया । निर्णायक मंडल में भारत के राकेश दुबे , राजेश कुमार , लंदन से शिखा वार्ष्णेय , तितिक्षा शाह थे । इसके अलावा एक युवा निर्णायक दल भी था जिसमे महक वेदी , पूनम दीवान , और कमलेश वालिया थे । आंकलन समिति और गणमान्य अतिथि बच्चों की भाषण शैली , व्याकरण , शब्द भंडार , और उच्चारण से अत्यधिक प्रभावित हुए । उन्होंने माना कि विजेताओं को चुनने में उन्हें बहुत कठिनाई हुई । समारोह के शुरुआत में हिन्दी समिति के संरक्षक श्री पदमेश गुप्ता ने हिन्दी समिति के इतिहास की भी जानकारी दी और बताया कि 1990 से स्थापित यह समिति पिछले 30 वर्षों से सम्पूर्ण यू.के. में हिन्दी भाषा को प्रोत्साहित करने में कार्यरत है । हर वर्ष भाषण तथा वाद - विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को भारत भ्रमण के लिए ले जाया जाता है । 9 से 12 वर्ष वाले वर्ग के विजेताओं के नाम : प्रथम वर्तिका सुशांत द्वितीय आर्या पटेल तृतीय अयान कंसल चतुर्थ अवनी सिंह प्रोत्साहन पुरस्कार ख्वाहिश 13+ वर्ष वाले वर्ग के विजेताओं के नाम :प्रथम वीर ठक्कर और प्रेरणा ठक्कर को संयुक्त द्वितीय आस्था पाटिल तृतीय प्रणव भाटिया वह विद्यार्थी जो भारत में पैदा हुए हैं लेकिन काफी वर्षों से यूके में रह रहे हैं उस वर्ग के विजेताओं के नाम : प्रथम मृणाली विजय कुमार द्वितीय श्रुतिका नायर तृतीय दिव्याक्षी प्रोत्साहन पुरस्कार कुशल समारोह के समापन पर हिन्दी समिति यू.के. कि अध्यक्षा श्रीमती सुरेखा चोफला और उपाध्यक्ष श्रीमती सीमा वेदी ने सभी को धन्यवाद किया और प्रतियोगियों को यह संदेश भी दिया कि भाषण प्रतियोगिता जीतना हिन्दी सीखने का अंत नहीं है बल्कि हिन्दी में आगे बढ़ने के लिए मात्र एक कदम है ।


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