इछावर के सबसे प्राचीन हनुमान मंदिर मे कलश-स्थापना,प्राण-प्रतिष्ठा यज्ञ का समापन,
पंच पंडित के सानिध्य मे पंच यजमान जोड़ों ने दी सात दिवस तक आहुतियाँ


राजेश शर्मा, इछावर
एमपी मीडिया पाइंट 

नगर के सबसे प्राचीन खेड़ापति हनुमान प्रतिमा के मंदिर का पुनर्निर्माण,प्राणप्रतिष्ठा,कलश स्थापना,शंकर-पार्वती की नवीन प्रतिमा स्थापना को लेकर चल रहे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का बुधवार 17 अप्रैल को पूर्णाहुति के सांथ समापन हो गया।


पं लक्ष्मीनारायण शर्मा,पंडित हरिनारायण शर्मा,पं अरविंद त्रिवेदी,पं राजेंद्र शर्मा एवं पं प्रमोद शर्मा के सानिध्य मे गत 10 अप्रैल से नगर के शीजगर मोहल्ला स्थित सबसे प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर मे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई थी।
सभी अनुष्ठान कार्यक्रमों मे यजमान जोड़े नगर पटेल मिश्रीलाल मुकाती,शंकरलाल मूंदड़ा,सुनील ताम्रकार,सीताराम टुवानी,हरीश गुप्ता रहे।

दोपहर 12:बजे शुभ मुहूर्त मे कलश स्थापना की गई, भगवान शिव एवं पार्वती माता की नवीन मुर्ति विधि-विधान के सांथ स्थापित की गई इसके पश्चात दोपहर पूर्णाहुति मे बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्यलाभ लिया।

बतादें कि शीजगर मोहल्ला स्थित हनुमानजी का सबसे प्राचीन मंदिर है जिसे खेड़ापति हनुमान के नाम से जाना जाता है। नगर पटेल मिश्रीलाल मुकाती,बुज़ुर्ग पंडित लक्ष्मीनारायण शर्मा आदि बताते हैं कि यह नगर की वह पहली हनुमान प्रतिमा है जिसे नगर के लक्ष्मीपुर (इछावर) की बसाहट के समय स्थापित किया गया था जिसका प्रमाण यह है कि इस प्रतिमा के पीछे लक्ष्मीपुर लिखा हुआ है। बाद मे मंदिर निर्माण चलता रहा अब पुनः इसका सन् 2019 मे किया गया।

खेड़ापति हनुमान मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि उक्त मंदिर साम्प्रदायिक एकता का भी जीता-जागता बेमिसाल उदाहरण है। जिस शीजगर मोहल्ले मे यह मंदिर विद्यमान है वहां एक भी परिवार हिंदू समाज का निवास नहीं करता पूरी सघन-बस्ती मुस्लिमों की है और काबिल-ए-तरीफ तो यह कि मंदिर की हिफाजत का जिम्मा भी वही मानते आ रहे हैं। इछावर का खेड़ापति हनुमान मंदिर यहां की गंगा-जमूनी तहज़ीब का बड़ा उदाहरण है।
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