लेखिका
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दिल दुखता है देख कर इन लाशों के ढेर
अब तो बंद कर मालिक ये मौत का खेल
किसी की तो वो कभी ज़िन्दगी रहा होगा
दिल पर पत्थर रख उसे विदा किया होगा
पता होगा कि वो कभी वापस न आएगा
फिर भी आगे बढ़ उसे होंसला दिया होगा
न अंतिम दर्शन कोई न अंतिम प्रार्थना ही
बस आंसुओं से कलेजा सौंप दिया होगा
अब कहर बरसाना बंद कर हे सृष्टिकर्ता
तु तो सबके दुःख हर्ता है नाम विघ्नहर्ता
तु अगर रूठा तो हम सब कहाँ जाएंगे
तु ना ख़ामोश रह ए खुदा हे मंगलकर्ता
रोयेंगे तड़पेंगे फिर तेरा ही ध्यान लगाएंगे
तुने ही बचाना है तु तो है कल्याणकर्ता
बच्चे गलती करें तो बड़े बदला नहीं लेते
उन्हें माफ करते हैं खुशियां नहीं छीनते
तुझे तो है सब ही पता तु तो है अंतर्यामी
तुझे भुला कर हम भटके चैन से न जीते
अब तो अपनी शरण मे ले दर तेरे आये
तु सुख समृद्धि दे लौटा दे वही दिन बीते
फिर से जग में वही खुशहाली ला कर दे
खेतों में दे हरियाली मल्हार सजा कर दे
जब गाती थी फ़ागुन के गीत सखी मिल
फिर से वही धुन तु मतवाली बजा कर दे
कुछ ना चाहे 'साया' इस से ज्यादा कुछ
दुनियां फिर से वही खुशियां तु ला कर दे
ये कैसा वक़्त आया
"""""""""""""""'"""दिल दुखता है देख कर इन लाशों के ढेर
अब तो बंद कर मालिक ये मौत का खेल
किसी की तो वो कभी ज़िन्दगी रहा होगा
दिल पर पत्थर रख उसे विदा किया होगा
पता होगा कि वो कभी वापस न आएगा
फिर भी आगे बढ़ उसे होंसला दिया होगा
न अंतिम दर्शन कोई न अंतिम प्रार्थना ही
बस आंसुओं से कलेजा सौंप दिया होगा
अब कहर बरसाना बंद कर हे सृष्टिकर्ता
तु तो सबके दुःख हर्ता है नाम विघ्नहर्ता
तु अगर रूठा तो हम सब कहाँ जाएंगे
तु ना ख़ामोश रह ए खुदा हे मंगलकर्ता
रोयेंगे तड़पेंगे फिर तेरा ही ध्यान लगाएंगे
तुने ही बचाना है तु तो है कल्याणकर्ता
बच्चे गलती करें तो बड़े बदला नहीं लेते
उन्हें माफ करते हैं खुशियां नहीं छीनते
तुझे तो है सब ही पता तु तो है अंतर्यामी
तुझे भुला कर हम भटके चैन से न जीते
अब तो अपनी शरण मे ले दर तेरे आये
तु सुख समृद्धि दे लौटा दे वही दिन बीते
फिर से जग में वही खुशहाली ला कर दे
खेतों में दे हरियाली मल्हार सजा कर दे
जब गाती थी फ़ागुन के गीत सखी मिल
फिर से वही धुन तु मतवाली बजा कर दे
कुछ ना चाहे 'साया' इस से ज्यादा कुछ
दुनियां फिर से वही खुशियां तु ला कर दे
सुषमा कुमारी सायागुरुग्राम
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परिचय
सुषमा कुमारी साया, गुरुग्राम हरियाणा से हैं। दिल्ली प्रशासन में इनकी सेवाएं हैं। अंग्रेजी इनके व्यवसाय का आधार है लेकिन मातृ भाषा के प्रेम के चलते रचनाएँ हिंदी में लिखती हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।


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