लेखक 

जानकी ने कहा था जो कल राम से


राधिका  ने कहा आज घनश्याम से 
नारीयां  हर   युगों  में  क्यों सहती यहां
गर वो सहती है तो चुप क्यों रहती यहां

नारियाँ जन्म  देती पुरुष को मगर
लोग  कहते  है उसमे है पौरुष नहीं
कोख   में  मारते उसको धिक्कारते
सब ये कहते है विष है तू पीयूष नहीं 
पहले  होता हरण उसपे ये आचरण
वो  परीक्षा की अग्नि में दहती यहां 
जानकी ने कहा था ………

छोड़ना था जो घर एक सिद्धार्थ को
अपनी पत्नी को देखो भुलाने चले
जो गृहस्थी भी अपनी चला न सके
धर्म का मर्म सबको बताने चले 
कोई इच्छा थी वो या परीक्षा थी वो
क्यों प्रतीक्षा में रानी वो रहती वहां
जानकी ने कहा था ………

प्यार उसने किया मीरा बाई बनी
संग  रहके   पति से पराई बनी 
प्रेम में हो सरल पी गई वो गरल
कृष्ण के छंद और वो रूबाई बनी
आपसे ये ज़मीं आपसे आसमां 
आप शीतल हवा सी है बहती यहां
जानकी ने कहा था जो........


गौतम कुमार वात्स्यायन

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परिचय 


गौतम कुमार वात्स्यायन
सीतामढ़ी बिहार के रहने वाले हैं। वर्तमान में  डी ए वी स्कूल मुजफ्फरपुर में कार्यरत हैं। साहित्य में रुचि है। समयानुसार साहित्य की सेवा करते रहते हैं। एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है। 
संपादक
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