दुकानों मे तब्दील हुए शिक्षा के मंदिर,
बाजार मे 10 रुपये मूल्य  की पुस्तक के वसूले जा रहे 90 से 120 रुपये,
प्राइवेट स्कूलों और स्टेशनरी संचालकों पर कार्रवाई की मांग,
निजी स्कूलों के कोर्स का ठेका चुनिंदा स्टेशनरी संचालकों को


सीहोर,  एमपी मीडिया पाइंट 

सालों से जिले भर में जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन के आला अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही के कारण सैकड़ों की संख्या में हर साल अस्तित्व में आने वाले निजी स्कूल और स्टेशनरी विक्रेता लाखों रुपए की पालकों से खुली लूट कर रहे है। इसको लेकर जिला उपभोक्ता परिषद की जिला इकाई ने एक ज्ञापन सौंपा है। 

मंगलवार को इस संबंध में परिषद के जिलाध्यक्ष विष्णु प्रजापति, जिला महिला विंग की अध्यक्ष मोहिनी मनीष अग्रवाल और शहराध्यक्ष नरेश आसुदानी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी एसपी त्रिपाठी और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर शिक्षा के नाम पर जारी ठगी को रोकने की मांग की है। 

इस संबंध में जिला उपभोक्ता परिषद के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शहर में प्रायवेट स्कूल संचालकों व स्टेशनरी विक्रताओं का शक्तिशाली गठजोड़ अब अभिभावकों और पालकों पर भारी पडऩे लगा है। कुछ निजी स्कूल संचालक विद्यार्थियों को किताब, कापी बेचकर अपनी जेब भर रहे हैं तो कुछ चुनिंदा स्टेशनरी दुकानों से सांठगांठ कर रखी है। बाजार में जिस पुस्तक का मूल्य 10 रुपये  है, उसे कमिशनखोरी के चलते सीहोर जिला मुख्यालय पर 90 से 120 रुपये तक बेचा जा रहा है। स्कूल संचालकों द्वारा चुनिंदा दुकानों से बच्चों का कोर्स खरीदने पर विवश किया जा रहा है। नगर की कुछ  स्टेशनरी की दुकान इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है।

 बच्चों को पढ़ाना बच्चों का खेल कतई नहीं

श्री दीक्षित के अनुसार ज्ञापन में कहा गया है कि बच्चों को पढ़ाना बच्चों का खेल कतई नहीं है। देश में बहुत कम ऐसे माता-पिता होंगे जिन्हें अपने बच्चे की स्कूल फीस को लेकर चिंता न होती हो। दूसरी तरफ स्कूल संचालक हैं कि हर बढ़ती क्लास के साथ फीस में 10 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी कर देते हैं। इतना ही नहीं पूरे सत्र के दौरान किसी न किसी नाम पर स्कूल संचालक अभिभावकों की जेब काटते ही रहते हैं। आखिर क्यों स्कूल अब शिक्षा केंद्रों की जगह किसी दुकान का सा रूप लेते जा रहे हैं!

इस संबंध में पूर्व में भी जनसुनवाई के मौके पर एक ज्ञापन जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने दिया था लेकिन बावजूद इसके एक भी स्टेशनरी संचालक और प्राइवेट स्कूल पर कार्रवाई नहीं की गई।

स्कूल संचालकों द्वारा नर्सरी से शुरू हो जाती वसूली

इस संबंध में परिषद का कहना है कि स्कूलों की ज्यादा फीस अभिभावको की मुसीबत बन रही है। स्कूलों द्वारा नर्सरी में प्राइमरी से ज्यादा फीस वसूली जा रही है बच्चों के बढ़ते क्लास के सांथ स्कूल फीस में भी बढ़ोतरी की जाती है। डोनेशन के नाम पर तो कभी बैग, जूतों, यूनिफार्म के मनमाने दाम लगा कर स्कूलों बच्चों के अभिभावकों से ज्यादा फीस वसूल रहे है। अधिकतर स्कूल कोर्स के लिए दुकान तय करते हैं। इतना ही स्कूल इवेंट्स के नाम पर भीबार-बार वसूली की जाती जो अनुचित है।
Share To:

Post A Comment: