अक्षय तृतीया पर किसानों का पूर्वानुमान,
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इसवर्ष बारिश होगी कम, गेहूं की पैदावार भी सुनिश्चित नही
राजेश बनासिया,भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
अक्षय तृतीया को किसानों के नववर्ष के रूप में माना जाता है। इस दिन किसान विभिन्न प्राचीन पद्वति से मानसून ओर आने वाली फ़सल का पूर्वानुमान लगाते है। इछावर तहसील के ग्राम धामन्दा स्थित हनुमान मंदिर से इस बार काबेड़ी से जो निकला है वह जनता के लिए कुछ मायूस करने वाले परिणाम आये है जो की आगामी फ़सल की पैदावर को लेकर खुश होने वाले संकेत नही है।
इछावर तहसील के ग्राम धामन्दा स्थित हनुमान मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन ग्राम वासी एक अनूठा आयोजन करते है और यह आयोजन कई वर्षों से होता चला आया है। इस बार भी लॉक डाउन का पालन करते हुए हनुमान मंदिर पर आने वाले साल में मौसम कैसा रहेगा!! कि बारिश कैसी होगी! ऐसे अनुमान काबेड़ी के तहत लगाए गए ग्राम में स्थित हनुमान जी के मंदिर में आज पूजा-अर्चना पंडित जी द्वारा हुई इसके बाद हनुमान जी के सामने एक बड़ा सा कलश रखा और उसमे रखे चार लड्डू उनको एक छोटे बालक द्वारा हनुमान जी की परिक्रमा करवाने के बाद कलश से लड्डू निकलवाए गए फिर वहां मौजूद पूजारी लड्डू फोड़कर देखते है चारो लड्डूओ में अलग,अलग सामग्री रखी जाती। एक लड्डू में पैसा,दूसरे में दूब तीसरे में ज्वार,ओर चौथे में कोयला रखा जाता है। अगर कोयला आता है तो वह अकाल पड़ने का संकेत देता,वैसे इसबार काबेड़ी में तीन बार ज्वारआई व एक बार पैसा आया है। इससे अनुमान लगाया जा रहा कि इस वर्ष बारिश कम होगी, सोयाबीन फसल के पैदा होने के संकेत भी कम हैं। गेंहू की फसल के भरपूर पैदा होने के संकेत नहीं है।
ग्रामीण कमल वर्मा (शिक्षक) बताते हैं कि काबेड़ी के माध्यम से निकले पूर्वानुमान कभी फेल नही होते इसी वजह से इस पद्धति को लेकर पूर्वकाल से लोगो की अटूट आस्था आज भी कायम है।
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इसवर्ष बारिश होगी कम, गेहूं की पैदावार भी सुनिश्चित नही
राजेश बनासिया,भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
अक्षय तृतीया को किसानों के नववर्ष के रूप में माना जाता है। इस दिन किसान विभिन्न प्राचीन पद्वति से मानसून ओर आने वाली फ़सल का पूर्वानुमान लगाते है। इछावर तहसील के ग्राम धामन्दा स्थित हनुमान मंदिर से इस बार काबेड़ी से जो निकला है वह जनता के लिए कुछ मायूस करने वाले परिणाम आये है जो की आगामी फ़सल की पैदावर को लेकर खुश होने वाले संकेत नही है।
ग्रामीण कमल वर्मा (शिक्षक) बताते हैं कि काबेड़ी के माध्यम से निकले पूर्वानुमान कभी फेल नही होते इसी वजह से इस पद्धति को लेकर पूर्वकाल से लोगो की अटूट आस्था आज भी कायम है।


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